- एमपी बजट 2026-27: सिंहस्थ के लिए 13,851 करोड़ का प्रस्ताव, उज्जैन में 3,060 करोड़ के नए विकास कार्य; 4.38 लाख करोड़ के कुल बजट में सिंहस्थ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस
- महाशिवरात्रि पर महाकाल में आस्था का सैलाब: 2 दिन में 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे, शीघ्र दर्शन से 62.50 लाख की आय; 1.95 करोड़ के 410.6 क्विंटल लड्डू प्रसाद की बिक्री
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती, सभा मंडप से गर्भगृह तक गूंजा “जय श्री महाकाल”: स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट, पंचामृत अभिषेक और भव्य श्रृंगार के साथ हुए दिव्य दर्शन!
- महाशिवरात्रि पर महाकाल को अर्पित हुआ पुष्प सेहरा, दोपहर में हुई विशेष भस्म आरती; चार प्रहर पूजन के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार
- उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 की शुरुआत: महाशिवरात्रि से 19 मार्च तक चलेगा सांस्कृतिक महापर्व, सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया उद्घाटन; ‘शिवोह्म’ संगीत संध्या से सजी पहली शाम
97 साल की दादी ने कोरोना को हराया:80% तक लंग्स में इंफेक्शन था
लगातार निगेटिव खबरों के बीच यह खबर आपको सुकून दे सकती है। इंदौर में 97 साल बुजुर्ग दादी शांतिबाई दुबे कोरोना को हरा कर घर लौटी हैं। उनके लंग्स में करीब 80% तक इंफेक्शन हो गया था। फिर भी डॉक्टरों ने और उन्होंने हार नहीं मानी। दृढ़ इच्छाशक्ति और बेहतर इलाज की बदौलत वह रामनवमी यानि बुधवार को अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटीं। खास है, शांतिबाई का जन्म 1925 में रामनवमी के दिन हुआ था। अपने जन्मदिन के मौके पर उन्हें नया जीवन मिला।
उज्जैन की रहने वाली शांतिबाई दुबे (97) को कोरोना संक्रमण के कारण लंग्स में इंफेक्शन 80 प्रतिशत तक बढ़ गया था। उन्हें 8 अप्रैल को इंदौर के इंडेक्स मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया। बेहतर उपचार और मानसिक बल के दम पर शांतिबाई दुबे ने कोरोना को परास्त कर दिखाया।
शांतिबाई दुबे की नातिन पूजा दीक्षित ने बताया, 4 अप्रैल को नानी का ब्लड प्रेशर बढ़ा। उन्हें उज्जैन में अस्पताल में भर्ती करवाया था। हालात में सुधार नहीं होने पर 7 अप्रैल को कोविड टेस्ट करवाया। उसी दिन सिटी स्कैन करवाया, तो फेफड़ों में 80 प्रतिशत तक संक्रमण निकला। इसके बाद वहां से इंदौर ले जाने की सलाह दी।
पिछले वर्ष भी जीती थी बुजुर्गों ने जंग
101 साल के बुजुर्ग संक्रमित पाए गए थे। संभवत: वे देश में सबसे उम्रदराज थे, जो कोरोना से संक्रमित हुए थे। बुजुर्ग लॉकडाउन में घर पर ही रहे। बावजूद वे संक्रमित कैसे हुए, यह पता नहीं चल पाया था। पेट दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जांच करवाने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। परिवार के बाकी 17 सदस्यों को घर पर ही क्वारैंटाइन किया गया था। कुछ दिनों बाद 101 साल की महिला ने भी कोरोना को मात दी थी।
95 साल की दादी ने कोरोना से जंग जीती
95 वर्षीय बुजुर्ग ने इस उम्र में कोरोना को हरा दिया था। 11 दिन चले इलाज के बाद वे स्वस्थ होकर अब घर में हैं। नेहरू नगर निवासी पोता बहू दीपा बताती हैं, परदादी के दूसरे नंबर के बेटे व मेरे ससुर की 2 अप्रैल को पसलियों में दर्द हुआ, तो अस्पताल ले गए। एक्स-रे में फेफड़ों में कफ निकला, तो दूसरे अस्पताल जाने के लिए कहा गया था।